All About Seniors
Kala

“आत्मनिर्भर” making the best of Corona Times.

बैठा तूँ क्यूँ हताश घरों में ,

अच्छे दिन अब आने को हैं ,

बहुत जूझ लिया तूने वक्त से,

विपदा के बादल जाने को हैं I

मत हो तू निराश इस क़दर,

अपने ही  मन को मीत किया,

दुनिया जिस आपदा से जूझ रही,

तूने है उसको जीत लिया I

आ रही है वो सुहानी सुबह ,

जिसे पाने को बेताब था तू,

काली रातों का हो गया है अंत ,

नई सुबह की अब किताब है तू I

मत सोच कि अब कल कैसा होगा ,

मुश्किल बहुत दिन ना आएँगे ,

विश्वास बिठा ले मन में तूँ प्यारे,

भरपूर ख़ुशियाँ यह लाएँगे I

महामारी को जो जीता है हमने ,

उज्ज्वल भविष्य हम बनाएँगे ,

हिम्मते मर्द मदद्दे ख़ुदा की सोच से

परचम भारत का विश्व में लहरायेंगे,

परचम भारत का विश्व में लहरायेंगे I

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